Aag
एक बार घर में छोटी सी
आग लग गयी
मैं चिल्लाया, लोग आये,
बोले क्या हुआ
देखा चूल्हे के पास कुछ कागज़ पड़े थे
कागज़ हटाये, पानी डाला
आग भग गयी!
एक बार घर में छोटी सी
आग लग गयी
मैं चीखा, लोग आये,
बोले क्या हुआ
देखा पूजाघर का दिया गिरा था
दिया सीधा किया, पानी डाला
आग भग गयी!
आज घर में हलका सा
धुआँ महसूस हुआ
मैंने आवाज़ दी, लोग आये
बोले क्या हुआ
-आग!
-कहाँ?
-धुआँ?
-अहं!
मैं चुप हो गया
लोग चले गये कहकर
ज्यादा सोचने से वहम
अकसर पल जाता है
ठीक कहते हैं,
फिर भी डरता हूँ
चिंगारी रह जाये अगर
घर जल जाता है
lagta hai isi kavita ke prerit ho kar san diego wild fire lagi..
Well said. I have also started using the Hindi fonts in my poems instead of English fonts.
Cheers!!!