Jeev
आजकल मेरी गाड़ी मुझसे बातें करती है
क्यों कहा उसे निर्जीव! इस बात पर लड़ती है
गाड़ी बोली
सिर्फ़ तू ही नहीं चलता, मैं भी तो चलती हूँ
तेल पीती और बढ़ती आगे, ठिकाने बदलती हूँ
मेंने कहा, हाँ तू चलती तो है
पर कब क्या करना है ये खुद कहाँ सोच पाती है
तुझे जहाँ चालक ले जाये, तू वहीं चली जाती है
मैं जीव हूँ, अपने कर्मों का स्वामी हूँ
और गाड़ी चुप! मेरी बात में दम था
कुछ देर बाद गाड़ी बोली,
सिर्फ़ तू ही नहीं बोलता, मुझमें भी तो आवाज़ है
कभी तीखी खर्राश है, कभी मधुर साज़ है
मेंने कहा, हाँ तेरी आवाज़ तो है
पर तेरे शब्द तू खुद कहाँ है ढूंड़ पाती है
तुझे जैसे कोई चलाये, तेरी वैसी ही आवाज़ आती है
में जीव हूँ, अपने शब्दों का स्वामी हूँ
और गाड़ी चुप! मेरी बात में दम था
थोड़ी देर में फिर गाड़ी बोली
सिर्फ़ तू ही नहीं करता महसूस, मेरे भी अरमान हैं
राहों से दोस्ती है, अच्छे बुरे की पहचान है
मैंने कहा, हाँ तुझे पहचान तो है
पर कब अच्छा लगे कब बुरा, ये तू खुद कहाँ बताती है
जैसी सड़क पे तुझे ले जाऊँ, वैसा ही महसूस कर पाती है
मैं जीव हूँ, अपनी भावनाओं का स्वामी हूँ
और गाड़ी चुप! मेरी बात में दम था
गाड़ी को पराजित कर खुशी से आगे बढ़ रहा हूँ मैं
कि एक गैंद आ लगती है अचानक पीछे शीशे पर
“कौन है साले!”, “दिखता नहीं है क्या!!”, मैं चिल्लाया
गुस्से से तरबतर, बिना विलम्ब के, गाड़ी से बाहर आया
आस पास ना दिखा कोई, मैं थोड़ा सकपकाया
हँसी खुशी सब दूर हुई, था क्रोध मन में छाया
गाड़ी अब भी शान्त थी,
शायद मुस्करा रही थी मुझ पर
कर्मों, शब्दों, भावनाओं के स्वामी पर!
और मैं चुप!
Brilliant…
Cheers!!!!