Navoday
गिर गया तो क्या, उठ, फिर देख आसमान को
इतनी आसानी से अपने ख्वाबों को नहीं तोड़ा करते
मुश्किल हो चाहे जितना, इक भरसक प्रयास तो कर
बनने से पहले ही बुलबुलों को नहीं फोड़ा करते
रुकावटें राह में आयेंगी, विचलित ना होना तू,
फेंके हुए पत्थर नदियों का रुख नहीं मोड़ा करते
ज़िम्मेदारी उठा ऐ माली खुद के लगाये पौधे की
नवजात शिशुओं को मँझधार में नहीं छोड़ा करते
अब समय है नये उदय का, भुला उन कढ़वी यादों को
पुराने घावों को नये पड़ावों से नहीं जोड़ा करते
‘फेंके हुए पत्थर नदियों का रुख नहीं मोड़ा करते’
bahut hi badiya line hai, kaafi creative aur novel hai (i hope original hai). mein to kinda fida ho gaya is line pe.
haan original hai..
phantom bhai, ekdum sahi kavita hai yeah..muhjhe bahut pasand hai..lagey raho! (hopefuly meri bhasha sudhar rahi hai
Bhaiya Poem is very nice, very thought provoking
Keep it up!!!
अब समय है नये उदय का, भुला उन कढ़वी यादों को
पुराने घावों को नये पड़ावों से नहीं जोड़ा करते
ekdum sahi kavita hai yeah..muhjhe bahut aachi lagi
Thank you, Thank you very much for………………